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घमंडी साँप

घमंडी साँप 

   


एक जंगल में कई जीव-जन्तु रहा करते थे। उसी जंगल में  एक तालाब था उस तालाब में असंख्य मेढक अपने-अपने परिवारों के साथ रहते थे। उन मेढकों में बहुत प्रेम था, एकता थी और उनको देखकर ऐसा लगता था। 

 जैसे वे सभी एक ही परिवार के सदस्य हों । मेढकों के बच्चे दिन भर साथ ही मौज-

मस्ती करते थे।


लाखन नाम का एक मेढक उन मेढकों का मुखिया था।

सभी लोग प्यार से उन्हें लाखन काका कहते थे। लाखन काका

बहुत ही समझदार थे। वे हर समय दूसरों की सहायता को

तत्पर रहते थे। सारे मेढक लाखन काका को बहुत प्यार करते

थे।


यों ही सभी मेढकों के मौज-मस्ती के दिन चल रहे थे। उन

लोगों को खाने-पीने की कोई समस्या नहीं थी और न ही किसी

को किसी प्रकार की चिन्ता थी। एक दिन दीनू नाम का एक

साँप घूमता हुआ तालाब के किनारे आया। उसे वह स्थान बहुत अच्छा लगा। 



वह अपने परिवार को उसी स्थान पर ले  आया और वही रहने  लगा। परिवार वालों के अतिरिक्त दीनू ने  अपने   मित्रो  उसी  जगह रहने का निमन्त्रण दिया।


दीनू के तालाब के किनारे  रहने पर मेढ़को  आफत 

में आ गई। 

दीनू और उसके साथी प्रतिदिन दस-बारह मेढकों

को अपना शिकार बनाते। मेढकों के बच्चे जब खेलने के लिए बाहर जाते तो वापस शायद ही आ पाते। 

सभी मेढकों को इस बात की बहुत चिन्ता हुई और उन्होंने इस पर लाखन काका कौ

सलाह माँगी। लाखन काका से वे सभी बोले, “काका! दीनू

और उसके साथी हमारे परिवार का धीरे-धीरे सफाया कर रहे है। 

इससे  अच्छा है कि हम सब यह स्थान छोड़कर अन्यत्र चले

जायें।'!


लाखन काका ने कहा, “हमने यह स्थान वर्षों की मेहनत के बाद रहने योग्य बनाया है।

 हम सब साँपो के पास चलते हैं

और उनसे बातचीत कर समझौता करने की कोशिश करते हैं।

कुछ मेढक काका के साथ दीनू के पास गये और हाथ जोड़कर

बोले  आप लोग इस जगह रहने आये हैं, तो आपका स्वागत है। 


वर्षों की मेहनत के बाद यह जगह हम लोगों ने रहने योग्य

बनाई है। आप आधी जगह पर अपना राज्य करिये और आधे पर

हम लोगों को रहने दें तो आपका बहुत एहसान होगा।'!

यह सुनकर दीनू क्रोधित होकर  फुँफकारते हुए बोला, '' तुम

कौन होते हो जगह का बँटवारा करने वाले? 

यहाँ पर हम और

हमारे दोस्त लोग ही रहेंगे। यदि तुमने फिर यहां आने की

कोशिश की तो तुम सब मारे जाओगे।”!


मेढक निराश होकर बापस लौट आये और दीनू के इस

व्यवहार से उन्हें बहुत दुख हुआ। सभी मेढक तालाब छोड़कर

अन्यंत्र  जाने की तैयारी करने लगे, 

इस पर लाखन काका बोले

“ आप लोग इतनी जल्दी निराश न हों । मैं इन साँपों को बुद्धिबल

से जीतूँगा। मेरा एक नेवला मित्र है, जिसका नाम है पिंटू।

 मैंने एक बार पिंटू की मदद की थी अतः मुझ पर जब विपत्ति पड़ी

है तो मुझे लगता है कि वह जृरूर ही हम लोगों की मदद

करेंगा।”'!


दूसरे दिन लाखन काका पिंटू नेवले के पास गये और बोले,

“हम लोग तालाब में मौज-मस्ती भरे दिन व्यतीत कर रहे थे

कि दीनू साँप अपने परिवार और मित्रों सहित वहाँ आ गया है

और हम लोगों को अपना शिकार बना रहा है।''

पिंटू बोला, “आप चिन्ता न करें, हम थोड़े दिनों में अपने

परिवार समेत तालाब किनारे आ जायेंगे, तब तंक आप लोग

कहीं और रहिये।'!


लाखन काका और उनके सभी साथी तालाब छोड़कर थोड़े

दिनों के लिए चले गये। दो दिन बाद पिंटू नेबला: अपने मित्रों

समेत तालाब के किनारे आ गये।


 उसने वहाँ यह प्रचार करवा दिया कि राज्य के सभी नेवले अब यहीं आकर रहेंगे। नेवले

वहाँ पर थोड़े ही आये थे परन्तु वे हर वक्त टहलते रहते थे,

जिससे लगता था कि काफी संख्या में नेवले आ गये हैं।


नेवलों को देखकर दीनू और उसके मित्र डरने लगे। रातों-

रात सारे साँप वह स्थान छोड़कर दूसरी जगह चले गये।


लाखन काका और सभी मेढक तालाब में पुन: वापस आ

गये और उन्होंने पिंटू और उसके साथियों को धन्यवाद दिया

और पुनः सुखपूर्वक जीवन-यापन करने लगे।

 

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