शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

Independence Day 2020

छात्रों के लिए मोटिवेशनल Independence Day  इन हिंदी 2020




आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, सभापति महोदय, प्रधानाध्यापक, शिक्षक गण, अभिभावक गण और मेरे सहपाठियों.

आज हम अपने देश की स्वतंत्रता दिवस की 74 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं.

यह दिन भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा हुआ है जिसे हर भारतीय जानता है और इसकी वजह से अपने आपको गौरवान्वित समझता है.

15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों के शासन से आजाद हुआ. इस आजादी के लिए भारत के कई माताओं ने अपने बेटे कुर्बान किए, कई दुल्हनों ने अपने सुहागो को बलिदान होने के लिए भेजा, तब जाकर यह आजादी हमें मिली.

अंग्रेजो ने हमारे देश में लगभग 200 सालों तक शासन किया और भारतीयों पर बहुत अत्याचार भी की है.

उनके शासनकाल के दौरान भारतीयों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा और उनके द्वारा किए गए अत्याचार सहना पड़ा.

लेकिन कहते हैं ना की अति का अंत जरूर होता है. ठीक उसी प्रकार इस ब्रिटिश शासन का भी 15 अगस्त 1947 को अंत हुआ और भारत को आजादी मिली.

इस आजादी की गवाह हम भी हैं क्योंकि हमारे पूर्वजों ने भी इसके लिए अपना बलिदान दिया है और आज हम स्वतंत्र भारत में चैन की सांस लेते हैं और अपने मन मुताबिक अपनी जिंदगी को गुजारते हैं.

जहां हम भारत के स्वतंत्रता की बात करें और महात्मा गांधी का नाम ना आए ऐसा हो ही नहीं सकता. गांधी जी ने अपने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए भारत की आजादी के लिए कई आंदोलन किए.

उनके आंदोलनों की वजह से देश की जनता को एकजुट होने में काफी मदद मिली और अंग्रेजो के खिलाफ इन्होंने अहिंसा का मार्ग अपनाकर अपनी लड़ाई जारी रखी.

चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान, राजगुरु, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस और ना जाने कितने ऐसे वीरों ने अपने पूरी जिंदगी भारत के आजादी के नाम लिख दी.

हर भारतीय को अपने स्वतंत्रता सेनानियों पर गर्व है और इस दिन हम इन सभी को दिल से याद करते हैं और उनको श्रद्धांजलि देते हैं.

इन्हीं शब्दों के साथ में अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं.

जय हिंद जय भारत
15 अगस्त पर भाषण – Heart touching speech on independence day in Hindi

आदरणीय सभापति महोदय प्रधानाध्यापक महोदय अभिभावक गण और मेरे सहपाठियों.

आज हमारे लिए बहुत खुशी का दिन है क्योंकि आज हम भारत की स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं.

हर साल 15 अगस्त को भारत के कोने कोने में राष्ट्रीय ध्वज कब फहराया जाता है और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को ज्ञात किया जाता है.

स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने अपनी जानो का बलिदान दिया.

अपने घर त्याग दिए उन सुख त्याग दिए और भारत की आजादी की लड़ाई में अंग्रेजो के खिलाफ डटकर खड़े हुए.

उन्हीं की कुर्बानियों का नतीजा है कि आज हम यहां पर खुली हवा में खड़े होकर अपना राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे हैं.

15 अगस्त 1947 के पहले हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था. अंग्रेज भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में आए. शुरुआत में इन्होंने व्यापार के बहाने से भारत में शरण ली और फिर धीरे-धीरे इन्होंने भारत पर कब्जा कर लिया.

इनके शासन के समय अंतराल में भारतीयों पर काफी अत्याचार हुए.

भारत देश वीरों का देश है और हमेशा से यहां पर वीर सपूत पैदा होते रहे हैं.

अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध भारत के वीरों ने जंग छेड़ दी.

भारत के वीर अंग्रेजो के खिलाफ खड़े हुए जबकि कई लोगों ने अहिंसा के रास्ते पर चलकर अंग्रेजों का विरोध किया और उन्हें भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया.

हमारे राष्ट्रपिता उन्हीं में से एक हैं जिन्होंने अहिंसा का मार्ग अपनाया और इसमें कई भारतीय शामिल हुए. उन्होंने महात्मा गांधी का पूरा समर्थन किया और अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन करते रहे.

सुभाष चंद्र बोस की बात करें तो उन्होंने आजाद हिंद फौज की गठन की और अंग्रेजो के खिलाफ लड़े. सरदार भगत सिंह ने बचपन से ही भारत की आजादी के लिए अपना काम शुरू कर दिया.

23 मार्च 1931 को भगत सिंह ने अपने देश के लिए हंसते-हंसते अपनी जान की कुर्बानी दे दी.

उसी देश के वासी हैं जिस देश में इन सभी बहनों ने जन्म लिया.

हम अपने भारतवर्ष पर गर्व करते हैं और इस की एकता और अखंडता के लिए हमेशा तत्पर खड़े तैयार रहते हैं.

आज हम सभी देशवासी यह प्रण करते हैं कि जब तक जिएंगे देश के लिए जिएंगे और मरेंगे तो देश के लिए मरेंगे.

चाहे कोई बाहरी ताकत आ जाए हम सब मिलकर एक साथ उसका सामना करेंगे और उस को पराजित करेंगे.

शब्दों के साथ में अपना भाषण समाप्त करता हूं.

जय हिंद जय भारत
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