गुरुवार, 30 जुलाई 2020

झाड़ी में जूता

पुराने ज़माने की कहानियों से बहुत कुछ ज्ञान की बाते भी रहती थी।  जो की हमारे स्कूल शिक्षा से पूरी नहीं होती। किताब के ज्ञान के साथ - साथ दुनियादारी का भी ज्ञान होना बहुत जरुरी है।
अपने बच्चो को ये सब कहानियाँ जरूर पढ़ के सुनाये "रोचक कहानियाँ " 





              बिलासपुर  में हीरे जवाहरात के व्यापार थे।  उनके पोते का जन्मदिन था।

परिवार वालों ने बच्चे का जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया सोमनाथ के पोते को हीरे मोती जड़े जूते उपहार में दिए। 

शाम के समय बच्चा अपने पिता के साथ सैर को निकला उसके पांव से एक जूता निकलकर कहीं गिर गया किसी को कुछ पता ना चला।

जूता एक नवयुवक को मिला उसका नाम अजीत था। वह नौकरी की तलाश में जा रहा था।उसने जूता उठाकर देखा तो चकित रह गया सोचा जूता किसी धनवान का है कीमती भी बहुत है इसलिए पहले इसे इसके मालिक तक पहुंचाना होगा।

इसी उधेड़बुन में वह सड़क के किनारे बड़ी देर तक खड़ा रहा तभी वहां से उसका मित्र भूषण गुजर रहा था उसने अजीत से पूछा भाई यहां खड़े खड़े क्या सोच रहे हो

अजीत बोला मुझे यहां एक कीमती जूता पड़ा मिला है।  जिसमें हीरे मोती जड़े मैं चाहता हूं जिसका यह जूता है उसे वापस दे सकूं ।
भूषण ने जूता देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।  उसके मन में लालच आ गया बोला अजीत भाई जिसका यह जूता है।  उसे मैं जानता हूं मैं उसके घर के पास ही जा रहा हूं, तुम जूता मुझे दे दो मैं इसे पहुंचा दूंगा। तुम क्यों परेशान हो निश्चिंत होकर अपने काम पर जाओ।


अजीत ने उस पर विश्वास का जूता उसे दे दिया।  जब भूषण जूता लेकर कुछ दूर चला गया तो अजीत के मन में शंका हुआ कहीं भूषण की नियत बिगड़ गई तो जूता उसके मालिक को नहीं मिलेगा इससे तो मैं भी उसके साथ चला जाता
यह सोचकर वह शीघ्र उस ओर भागा जिधर भूषण गया था दूर उसे भूषण जाता हुआ दिखाई दिया उसने आवाज लगाई भूषण भूषण रुक जाओ मैं भी आ रहा हूं। प्रभु भूषण नहीं रुका उसने अपनी चाल और तेज कर दी वह झाड़ी के बीच जाकर गायब हो गया

काफी खोजने के बाद उसे भूषण दिखाई दिया  उसने देखते ही अजीत बोला तुम कहां चले गए थे।  लाओ जूता मुझे दे दो मैं ही उसे उसके मालिक तक पहुंचाऊंगा
कौन सा जूता तुमने मुझे कब दिया भूषण बोला
ये कैसी  बातें कर रहे हो ! अभी कुछ देर पहले ही तो दोनों में झगड़ा होने लगा भीड़ इकट्ठी हो गई मामला दरोगा तक पहुंचा उसने भूषण की तलाशी ली पर जूता ना मिला दरोगा को विभूषण पर कुछ शक हुआ वह दोनों को राजा के पास ले गया और पूरी बात बताई

राजा ने दोनों से सच बोलने को कहा दोनों अपनी अपनी बात पर अड़े रहे अंत में राजा ने भूषण को छोड़ दिया वह वहां से चला गया यह देख अजीत को बड़ी निराशा हुई तभी राजा ने कहा तुम कुछ देर यहीं ठहरो

राजा ने अपने कुछ गुप्त चरणों को भूषण के पीछे भेज दिया भूषण इस बात से बेखबर था वह सीधा वही पहुंचा जहां झाड़ियों में उसने जूता छुपाया था जब उसे विश्वास हो गया कि कोई उसका पीछा नहीं कर रहा है तो उसने एक झाड़ी से जूता निकाल दिया फिर घर की ओर चल दिया तभी राजा के गुप्त चारों ने उसे पकड़ लिया और उसे दरबार में लाया गया

अजीत तो पहले से ही दरबार में मौजूद था राजा ने भूषण को कारागार में डलवा दिया जूता अजीत को वापस कर दिया गया तब अजीत ने कहा महाराज मेरे लिए इस बात का पता लगाना कठिन होगा कि इस जूते का असली मालिक कौन है इसलिए इसे आप राजकोष में जमा कर लीजिए जब इसका मालिक मिल जाए तो उसे लौटा दें

राजा अजीत की ईमानदारी पर प्रसन्न हुआ बोला तुम्हारी बात ठीक है मैं घोषणा करवाता हूं और जिसका भी यह जूता है वह ऐसी ही दूसरा जूता ले आए

राजा ने घोषणा करवाई जब सोमनाथ को इसका पता लगा तो वह भागा भागा राजा के पास आया उसने दूसरे पैर का जूता दिखा दिया राजा ने दोनों जूतों को मिलाया तो दोनों एक जैसे ही थे राजा ने अजीत को भी बुलवा लिया

व्यापारी ने अजीत की ईमानदारी पर खुश होकर इनाम देना चाहा लेकिन उसने इंकार कर दिया कहां यह तो मेरा कर्तव्य था मैं तो काम की तलाश में जा रहा था। 😉

व्यापारी ने अपने साथ काम करने के लिए कहा तभी राजा ने कहा अजीत की नौकरी तो लग चुकी है इस बार सब चौंक उठे तब राजा ने कहा अजीत जैसे ईमानदार व्यक्ति की राज्य को ज्यादा आवश्यकता है

फिर राजा ने मंत्री से कहा मंत्री जी अजीत के योग्य नौकरी की व्यवस्था कीजिए राजा के निर्णय पर सभी प्रसन्नता अजीत की खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी

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