शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

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गुरुवार, 30 जुलाई 2020

"60 गांव बकरी ने चरे" पुरानी कहावत का खुलासा

पुराने ज़माने की कहानियों से बहुत कुछ ज्ञान की बाते भी रहती थी।  जो की हमारे स्कूल शिक्षा से पूरी नहीं होती। किताब के ज्ञान के साथ - साथ दुनियादारी का भी ज्ञान होना बहुत जरुरी है।
अपने बच्चो को ये सब कहानियाँ जरूर पढ़ के सुनाये "रोचक कहानियाँ " 


प्राचीन समय की बात है
        पहले  राजा  शिकार के बहुत  शौकीन हुआ करते थे।  एक बार शिकार खेलने गया। जंगल में जानवर का पीछा करते-करते अपने साथियों से बिछड़ गया।

रात हो गई। भूखा प्यासा राजा किसी तरह एक किसान के दरवाजे पर पहुंचा। किसान राजा को क्या जाने ? किसान ने मेहमान समझकर उसे बैठाया, पानी पिलाया। कुछ देर बाद भोजन बनाकर खिलाया। उसके सोने के लिए बिस्तर लगाया।

राजा किसान से बहुत खुश हुआ। अगले दिन राजा चलने लगा, तो उसने एक पत्ता उठाया।  किसान के नाम 60 गांव लिख दिए। किसान को बताया तो वह फूला ना समाया । राजा अपनी राह चला गया।

किसान की थी एक पालतू बकरी । बकरी वहां आई और झट से उस पत्ते को चबा लिया। किसान जब तक उसे रोकता , पत्ता बकरी के पेट में पहुंच चुका था। अब किसान करे तो क्या करें ? 😞वह किसी तरह रोता कलपता राज महल पहुंचा ।

दरबारी उस गवार को अंदर नहीं आने दे रहे थे । बहुत हाथ पांव जोड़ने पर राजा तक पहुंच पाया। राजा ने देखते ही उसे पहचान लिया। राजा कुछ पूछते तभी
किसान चिल्ला कर बोला -"माई बाप मैं बर्बाद हो गया 60 गांव बकरी ने चबा लिए।"

आसपास के लोग हैरान होकर गांव और किसान को देख रहे थे कि क्या बकता है। लेकिन राजा समझ गया। उसने तांबे के टुकड़े पर खुदवा कर उसे दोबारा आदेश पत्र दिया। किसान को गांव का पक्का मालिक बना दिया।

तब से किसान का बड़ा नुकसान होने पर लोग कहते हैं 60 गांव बकरी ने चर लिए।

झाड़ी में जूता

पुराने ज़माने की कहानियों से बहुत कुछ ज्ञान की बाते भी रहती थी।  जो की हमारे स्कूल शिक्षा से पूरी नहीं होती। किताब के ज्ञान के साथ - साथ दुनियादारी का भी ज्ञान होना बहुत जरुरी है।
अपने बच्चो को ये सब कहानियाँ जरूर पढ़ के सुनाये "रोचक कहानियाँ " 





              बिलासपुर  में हीरे जवाहरात के व्यापार थे।  उनके पोते का जन्मदिन था।

परिवार वालों ने बच्चे का जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया सोमनाथ के पोते को हीरे मोती जड़े जूते उपहार में दिए। 

शाम के समय बच्चा अपने पिता के साथ सैर को निकला उसके पांव से एक जूता निकलकर कहीं गिर गया किसी को कुछ पता ना चला।

जूता एक नवयुवक को मिला उसका नाम अजीत था। वह नौकरी की तलाश में जा रहा था।उसने जूता उठाकर देखा तो चकित रह गया सोचा जूता किसी धनवान का है कीमती भी बहुत है इसलिए पहले इसे इसके मालिक तक पहुंचाना होगा।

इसी उधेड़बुन में वह सड़क के किनारे बड़ी देर तक खड़ा रहा तभी वहां से उसका मित्र भूषण गुजर रहा था उसने अजीत से पूछा भाई यहां खड़े खड़े क्या सोच रहे हो

अजीत बोला मुझे यहां एक कीमती जूता पड़ा मिला है।  जिसमें हीरे मोती जड़े मैं चाहता हूं जिसका यह जूता है उसे वापस दे सकूं ।
भूषण ने जूता देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।  उसके मन में लालच आ गया बोला अजीत भाई जिसका यह जूता है।  उसे मैं जानता हूं मैं उसके घर के पास ही जा रहा हूं, तुम जूता मुझे दे दो मैं इसे पहुंचा दूंगा। तुम क्यों परेशान हो निश्चिंत होकर अपने काम पर जाओ।


अजीत ने उस पर विश्वास का जूता उसे दे दिया।  जब भूषण जूता लेकर कुछ दूर चला गया तो अजीत के मन में शंका हुआ कहीं भूषण की नियत बिगड़ गई तो जूता उसके मालिक को नहीं मिलेगा इससे तो मैं भी उसके साथ चला जाता
यह सोचकर वह शीघ्र उस ओर भागा जिधर भूषण गया था दूर उसे भूषण जाता हुआ दिखाई दिया उसने आवाज लगाई भूषण भूषण रुक जाओ मैं भी आ रहा हूं। प्रभु भूषण नहीं रुका उसने अपनी चाल और तेज कर दी वह झाड़ी के बीच जाकर गायब हो गया

काफी खोजने के बाद उसे भूषण दिखाई दिया  उसने देखते ही अजीत बोला तुम कहां चले गए थे।  लाओ जूता मुझे दे दो मैं ही उसे उसके मालिक तक पहुंचाऊंगा
कौन सा जूता तुमने मुझे कब दिया भूषण बोला
ये कैसी  बातें कर रहे हो ! अभी कुछ देर पहले ही तो दोनों में झगड़ा होने लगा भीड़ इकट्ठी हो गई मामला दरोगा तक पहुंचा उसने भूषण की तलाशी ली पर जूता ना मिला दरोगा को विभूषण पर कुछ शक हुआ वह दोनों को राजा के पास ले गया और पूरी बात बताई

राजा ने दोनों से सच बोलने को कहा दोनों अपनी अपनी बात पर अड़े रहे अंत में राजा ने भूषण को छोड़ दिया वह वहां से चला गया यह देख अजीत को बड़ी निराशा हुई तभी राजा ने कहा तुम कुछ देर यहीं ठहरो

राजा ने अपने कुछ गुप्त चरणों को भूषण के पीछे भेज दिया भूषण इस बात से बेखबर था वह सीधा वही पहुंचा जहां झाड़ियों में उसने जूता छुपाया था जब उसे विश्वास हो गया कि कोई उसका पीछा नहीं कर रहा है तो उसने एक झाड़ी से जूता निकाल दिया फिर घर की ओर चल दिया तभी राजा के गुप्त चारों ने उसे पकड़ लिया और उसे दरबार में लाया गया

अजीत तो पहले से ही दरबार में मौजूद था राजा ने भूषण को कारागार में डलवा दिया जूता अजीत को वापस कर दिया गया तब अजीत ने कहा महाराज मेरे लिए इस बात का पता लगाना कठिन होगा कि इस जूते का असली मालिक कौन है इसलिए इसे आप राजकोष में जमा कर लीजिए जब इसका मालिक मिल जाए तो उसे लौटा दें

राजा अजीत की ईमानदारी पर प्रसन्न हुआ बोला तुम्हारी बात ठीक है मैं घोषणा करवाता हूं और जिसका भी यह जूता है वह ऐसी ही दूसरा जूता ले आए

राजा ने घोषणा करवाई जब सोमनाथ को इसका पता लगा तो वह भागा भागा राजा के पास आया उसने दूसरे पैर का जूता दिखा दिया राजा ने दोनों जूतों को मिलाया तो दोनों एक जैसे ही थे राजा ने अजीत को भी बुलवा लिया

व्यापारी ने अजीत की ईमानदारी पर खुश होकर इनाम देना चाहा लेकिन उसने इंकार कर दिया कहां यह तो मेरा कर्तव्य था मैं तो काम की तलाश में जा रहा था। 😉

व्यापारी ने अपने साथ काम करने के लिए कहा तभी राजा ने कहा अजीत की नौकरी तो लग चुकी है इस बार सब चौंक उठे तब राजा ने कहा अजीत जैसे ईमानदार व्यक्ति की राज्य को ज्यादा आवश्यकता है

फिर राजा ने मंत्री से कहा मंत्री जी अजीत के योग्य नौकरी की व्यवस्था कीजिए राजा के निर्णय पर सभी प्रसन्नता अजीत की खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी

बुद्धिमान साधू की कहानी

पुराने ज़माने की कहानियों से बहुत कुछ ज्ञान की बाते भी रहती थी।  जो की हमारे स्कूल शिक्षा से पूरी नहीं होती। किताब के ज्ञान के साथ - साथ दुनियादारी का भी ज्ञान होना बहुत जरुरी है।
अपने बच्चो को ये सब कहानियाँ जरूर पढ़ के सुनाये "रोचक कहानियाँ " 



बहुत समय पहले की बात है एक राजा हुआ करता था। उसको अपनी दौलत का बहुत ही घमंड था वह खुद को दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति मानता था और जहाँ देखो अपनी दौलत कि शान बताता रहता था यह बात एक साधू को पता चली तो साधु ने राजा की परीक्षा लेने की सोची


साधु ने एक योजना बनाई और राजा के पास पहुंच गया राजा अपनी ऐश और आराम की ज़िंदगी मैं व्यस्त था राजा के सिपाहियों ने राजा को बताया की महाराज द्वार पर एक साधु आया है ,


राजा  ने सिपाहियों से कहा की जाओ  उस साधु को मेरे पास ले आओ सिपाहियों ने राजा की आज्ञा का पालन करते हुए साधु को राजा के दरबार में ले आये


राजा मुस्कुराते हुए साधु से कहता है की बोलो तुम्हें क्या चाहिए आज मेरा मन बहुत ही प्रसन्न है तुम्हे  जो चाहिये बस कह दो मैं तुम्हें इतना दान कर दूंगा की तुम्हारी पीढ़ियों को कभी भिक्षा मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी पर साधू ने कुछ नहीं माँगा राजा को क्रोध आने लगा


साधु राजा के दरबार मैं इधर उधर नज़र फेर के देखने लगा तो उसे दिखा की राजा के २ मंत्री साथ मैं बैठ कर शतरंज का खेल खेल रहे थे यह देख कर साधू के दिमाग मैं एक योजना आयी उसने राजा से कहा की हे राजन तुम मुझे कुछ दान करना हि चाहते हो तोह मेरी एक इक्छा है की तुम मुझे कुछ   चावल के दाने दान कर दो


राजा ने कहा बोलो तुम्हें कितने चावल के दाने चाहिए तुम्हें


तो साधू ने शतरंज खेलते हुए मंत्रियो की तरफ इशारा करते हुए कहा की इस शतरंज के खेल मैं जितने खाने बने हुए हैं मुझे बस उतना ही चावल चाहिए।


राजा हसते हुए कहता है मुर्ख साधू तुम दुनिया के सबसे अमीर राजा के सामने खड़े हो तुम जो भी मांगोगे मैं देने को तैयार हु। और तुम एक शतरंज के खेल के 64 खाने के बराबर चवाल के दाने मांग रहे हो तुम्हारी मती  ख़राब हो गयी है क्या मुर्ख


साधू ने कहा: मुझे बस उतना ही चाहिये महाराज पर मेरी एक शर्त है


राजा ने कहा क्या शर्त है बताओ


तो साधू ने कहा की आप मुझे पहले खाने मैं एक चावल का दाना दीजिये और अगले खाने मैं पहले खाने से दो गुना चावल के दाने रखियेगा


राजा ठहाके से हस्ते हुए बोला : लगता है की तुम पूरी तरह से अपना दिमागी संतुलन खो चुके हो मैं तुम्हें इतनी धन सम्पत्ती  देने को तैयार हु और तुम हो की शतरंज के 64 खाने मैं अटके हुए हो चलो तुम्हारी जैसी इक्छा


राजा ने अपने सैनिको को बुलाया और आदेश दिया की इस साधू को शतरंज के 64 खाने मैं प्रत्येक खाने मैं पिछले खाने से दो गुना करके चावल के दाने दे दिए जाएँ


राजा इतना कह कर अपने विश्राम कक्ष मैं चला गया


यहाँ साधु को चावल दान देने के लिए सैनिको ने तैयारी कर ली


शतरंज खेलने वाला ६४ खाने का तख्ता रखा गया पहले खाने मैं चावल का 1 दाना आया दूसरे खाने मैं 2 चावल के दाने इसी प्रकार तीसरे मैं पिछले खाने से दो गुना ज्यादा दाने अर्थात 4 दाने और अगले मैं 8 फिर अगले मैं 16 फिर अगले मैं 32 फिर 64 फिर 128 फिर 256 फिर  512  फिर 1024 फिर 2048 फिर 4096 इस तरह से चावल के दाने बढ़ते बढ़ते चौबीसवें खाने मैं 8388608 चावल के दाने रखने पढ़ रहे थे।
 और राजा का आदेश पूरा करने के लिए सैनिको को समस्या आने लगी सारे सैनिक परेशान हो कर राजा के पास पहुंच गए सैनिको ने राजा से कहा महाराज राज महल का  सारा अनाज ख़त्म हो गया है।  और अभी साधु के मांगे हुए दान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं हो पाया है।


राजा ने साधू को दिए हुए दान को पूरा करने के लिए  अपने सभी राज्य से अनाज मंगवाना शुरू कर दिया देखते ही देखते 3  4 खाने मैं अनाज भरने के बाद राजा के सभी राज्य का अनाज  ख़त्म हो गे गया फिर राजा ने अपनी सारी दौलत के बदले दूसरे राजाओ से उनके राज्य का अनाज भी मंगवा लिया


लेकिन फिर भी राजा उस साधू की मांगी हुई छोटी सी भिक्षा की पूर्ति नहीं कर पाया फिर साधु ने राजा से कहा की मुझे तुम्हारा ये दौलत का घमंड तोडना था इसी लिए मैंने अपने तर्क से तुमसे इस प्रकार का दान माँगा


शतरंज के 64 खानों के बराबर अनाज तो पूरी पृथ्वी में  नहीं होगा तो तुम कैसे मुझे दे पाओगे??😌😌





तो ये कहानी यही ख़त्म होती  है उम्मीद करता हूँ आपको ये कहानी पसंद  आयी होगी


कमेंट करके जरूर बताईये मुझे ख़ुशी होगी


जाते जाते एक प्रश्न करना चाहूंगा


आखिर 64 खानो मैं कितने दाने आएंगे ?

दांतों की परी (परियों की कहानी)

                             




         मिंकी एक 6 साल की लड़की थी! वह अपने बिस्तर पर अपने मां के बाजू से सो रही थी और उसकी मम्मी उसको परियों की कहानी सुना रही थी!  
मिंकी बोलती है मां के सच में परियां होती है? 
उसकी मां बोलती है हाथी पर परियों को सिर्फ अच्छे बच्चे पसंद होते हैं  परी कभी बुरे बच्चों के सामने नहीं आती तो तुम्हें कभी शैतानी नहीं करनी  क्योंकि परियां हमेशा तुम्हें देखती रहती है चलो अब सो जाओ मिंकी
अगले दिन सुबह   मिंकी अपनी बहन पिंकी के साथ टेबल में बैठकर  खिलौनों से खेल रही थी वही उसकी मां बैठी होती है और वह बोलती हैं पिंकी गुड़ियों से खेलना बंद करो और मिंकी जल्दी से अपना एप्पल खा लो 
मिंकी कहती है मुझे भूख नहीं है मां नहीं पीना मुझे 
उसकी मां बोलती है तुम अच्छी बच्ची हो ना जल्दी से  खा लो नहीं तो परिया नहीं आएंगी  
मिंकी बोलती है अगर मैंने यह एप्पल खा लिया तो परियां  आएंगी
मां बोलती है तुम अगर एप्पल खाओ गी नहीं तो कैसे पता चलेगा
मिल्की जल्दी से फल खाना शुरु कर देती और अचानक जोर से रोने लगती है और कहती है देखो मां मेरा दांत टूट गया अब मैं इसे अपने तकिए के नीचे रख दूंगी और फिर दांतों की परी आ जाएगी 
 अपना दांत लेकर अपने कमरे  की ओर भागती है
 मां बोलती है मिंकी जल्दी सो जाना नहीं तो दांतों की परी नहीं आएगी
 मां जैसे ही दरवाजा बंद करती है तो रोशनी की किरण खिड़की से अंदर आती हैं
 मिंकी तकिए के नीचे रखा अपना दांत  देखती है और सो जाती है
 कुछ देर बाद  मिंकी की नींद किसी आवाज के कारण खुल जाती है और वह आंख खोल कर देती है कि उसके सामने एक बहुत सुंदर परी थी जिसमें सफेद रंग की गाउन पहन रखी थी और उसके हाथ में उसकी जादुई छड़ी थी और वह  मिंकी के सामने उड़ रही थी
 मिंकी पूछती है क्या तुम  दांतों की परी हो
 परी कहती है  हां मिंकी मैं ही दांतो की परी हूं तुम एक अच्छी लड़की हो इसीलिए मैं तुम्हारे दांत लेने आई हूं और तुम्हें गिफ्ट देने आई हूं क्या चाहिए  मिंकी तुम्हें 
मिंकी कहती है मुझे परियां बहुत पसंद है क्या तुम मुझे भी एक परी बना सकती हो
 परी कहती है हां बिल्कुल आबरा का डाबरा
 मिंकी एक छोटी परी में बदल जाती है
  मिंकी कहती है वाह धन्यवाद
 दांतों वाली परी कहती है चलो मिंकी हम बादलों में चलते हैं जैसे दूसरी परियां उड़ती हैं
  परी  मिंकी का हाथ पकड़ती है और वह उड़ते उड़ते खिड़की से निकल कर बादलों के पीछे पहुंच जाती हैं उनकी को बहुत मजा आ रहा था और वह हंसे जा रही थी कुछ टाइम बाद वह लोग फिर से घर के अंदर आ जाते
 दांतों की परी कहती है बाय  मिंकी अच्छी बच्ची की तरह रहना तुम
 मिंकी कहती है अब आप वापस कब आओगी
 तो दांत वाली परी कहती है जब तुम्हारे पास  दांत होगा
  मिंकी के दांत टूटते हैं और वह  परी से मिलती है और बादलों की सैर करने जाती है
 एक दिन मिल की टेबल पर बैठकर अपने दांतो को हिला रही थी
 ऐसा करते हुए उसकी मां ने देख लिया तो उसकी मां कहती है नहीं मिंकी ऐसा नहीं करो
 मिंकी कहती है मां मुझसे इंतजार नहीं हो रहा मुझे दांतों की परी से मिलना है
 उसकी मां थोड़ा सा हस्ती है
 मिंकी की  बहन पिंकी का दांत एक दिन टूट जाता है
  पिंकी भी अपना दांत तकिए के नीचे रख देती है लेकिन मिंकी चुपके से उसका दांत अति के नीचे से निकाल लेती है और अपने तकिए के नीचे रख लेती है अचानक वह उठती है और आईने के सामने जाकर देखती है किसके साथ गायब हो चुके यह देखकर वह रोने लगती है  दांतों की परी आ जाती है
 परी कहती है क्या हुआ  मिंकी क्यों रो रही हो
 मिंकी रोते रोते हुए कहती है क्योंकि मेरे सारे दांत गायब हो गए हैं अब सब मेरा मजाक उड़ाएंगे
 तो परी कहती हैं मैंने कहा था तुम कभी शैतानी मत करना तो फिर तुम शैतान बच्ची क्यों बनी यह तुम्हारी सजा है तुमने पिंकी का दांत चुराया है
  मिंकी कहती है मुझे माफ कर दो
 परी पूछती है क्या तुम फिर से ऐसा करोगी
 मिंकी कहती है नहीं नहीं अब मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी
 तो दांतों की परी कहती है मुझे तुम पर भरोसा है
 फिर परी अपनी जादुई छड़ी  चलाती हैं और मिंकी के दांत फिर से वापस आ जाते हैं पिंकी भी उठ जाती है और आकर वह परी को गले लगाती है
 परी कहती है बच्चों में तुम्हें परियों की तरह  उड़ाती हूं 
 और तीनों आसमान में उड़ जाते हैं
 आज की कहानी यहीं खत्म होती है अगर आपको अच्छा लगा तो कमेंट करके जरूर बताइए

मंगलवार, 28 जुलाई 2020

आज का ज्ञान

आज का ज्ञान










2 अगस्त को फ्रेंडशिप डे है - लड़के लड़कियों के पीछे!
3 अगस्त को राखी है - लड़कियां लड़कों के पीछे!

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कोरोना अब गली-गली और घर-घर जाकर ढूंढ रहा है कि...
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थाली और ताली किसने बजायी थी?

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नहीं चाहती मैं तुम्हें किसी कीमत पर खोना...
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यही कह कह कर वो लगाती है चूना!

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आज-कल के बच्चों के मार्क्स फॉरेनहाइट में आते हैं 98.2, 98.4, 98.9...
हमारे तो सेंटीग्रेड में आते थे 37.1, 37.4, 37.6!

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मैं बचपन में इतना सुंदर था कि मैडम कहती थी...
वहाँ से उठ, मेरे सामने आ कर बैठ!

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उससे बिछड़ के हम रोये इतना कि उसकी बहन बोली तू मुझे पटा ले...
फिर क्या था हमने आँसू पोछते हुए उसको गले लगा लिया!

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आज का ज्ञान:
इश्क़ की नाव में पहला छेद तब होता है जब महबूबा से खुबसूरत उसकी सहेली होती है!

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आजकल के बच्चे को सब्ज़ी पसंद ना हो तो माँ के पास बहुत ऑप्शन हैं!
बेटा पास्ता बना दूँ, बेटा मैग्गी खाओगे?
एक हमारा समय था, हमारी माँ के पास दो ही ऑप्शन थे!
सब्ज़ी खाओगे या जूते?
और हम दोनों ही खा लेते थे, पहले जूते फिर सब्ज़ी!


शनिवार, 25 जुलाई 2020

सकरात्मक सोच (Positive Thinking)

बोली बोले जहर घोले
बोली ऐसी है रस भरी।
अगर आप शब्द संरचना करना जानते है।  आप को अच्छे समाज में जाने की चाभी मिल सकती है।
आइये कुछ अनमोल वचन  है।  और अपने रोजमर्रा की जिंदगी में उसका पालन करते है।



1जीवन में वही लोग सफल होते है जो लोग सकरात्मक सोच (Positive Thinking) के साथ आगे बढ़ते है। 
2 :- बेहतर करना अच्छी बात है लेकिन किसी का बेहतर करना बहुत बड़ी बात है। 
3 :- जो आप बुरे वक्त में काम आये वही आपका सच्चा मित्र है। 
4 :- जैसा सोचेगे वैसा ही बनेगे। 
6 :- अनुशासन जीवन को महान बनाता है। 
7 :- जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा। 
8 :- इच्छा दुखो का मूल कारण है। 
9 :- अक्सर सुख देने वाले लोग भुला दिए जाते है यही जीवन की सच्चाई है। 
10 :- चेहरे क्रीम पावडर से नही बल्कि अपनी काबलियत से चमकते है। 
11 :- कमिया तो हर कोई निकाल देता है लेकिन अच्छाई देखना आपकी काबिलियत को दिखाता है। 
12 :- अब त्यौहार नही बल्कि लोगो के व्यवहार फीके हो गये है इसलिए अब वो खुशिया नही दिखती। 
13 :- बोलना तो जन्म के दो वर्षो बाद ही सीख जाते है लेकिन बोलना क्या है इसे सीखने में पूरा जीवन लग जाता है। 
14 :- किसे सुधरना है या बिगड़ना है यह मनुष्य के स्वभाव पर निर्भर करता है। 
15 :- अगर आपके रहते आपके पिता फटे कपड़े पहनते है तो आपके महंगे कपड़े पहनने का कोई फायदा नही है और माँ से ऊँची आवाज़ में बात करते है तो देवी की पूजा करने से कोई फायदा नही है। 
16 :- बनना है मेहँदी के पत्तो की तरह बनो जो टूटने के बाद भी दुसरो के काम आते है। 
17 :- जहा बोलचाल बंद होते है वही सुलह के रास्ते भी बंद हो जाते है। 
18 :-अगर आपके अंदर सब्र की ताकत रखते है तो निश्चित ही एक दिन आपकी विजय जरुर होंगी। 
19 :- आँखों को बंद करने से नही बल्कि इन मुसीबत का सामना डटकर करने से ही मुसीबत खत्म होती है। 
20 :- धोखा से सिर्फ कुछ समय के लिए जीत हासिल कर सकते है लेकिन प्यार से आजीवन भर विश्वास हासिल कर सकते है। 
21 :- दुसरो की कमिया ढूढना आसान है लेकिन वही लोग महान बन पाते है जिन्हें अपनी कमिया दिखती है और उन्हें दूर कर सकते है। 
22 :- घमंड का सर हमेशा  नीचे  होता है। 
23 :- जहा घमंड होता है वहा वह अपने सिवा कुछ और देखना और सुनना पसंद नही करता है। 
24 :- सबके जीवन में समान अवसर आते है लेकिन जो इन अवसरों का लाभ उठाते है वही लोग सफलता के मार्ग पर चल सकते है। 
25 :- सोचने से ज्यादा किसी काम को करने में विश्वास रखना चाहिए। 
26 :- यदि अपने आप को कमजोर समझते है.तो यह अपने आप के साथ धोखा है। 
27 :- यदि जो लोग खुद पर विश्वास करते है वे खुद का सम्मान करते है और वही लोग आगे बढ़ते है। 
28 :- यदि किसी भी कार्य को मेहनत और लगन से करते है तो उस कार्य में कभी असफल नही हो सकते है। 
29 :-अड़चने चाहे कितनी भी आये कोशिश करने वाले कभी हार नही मानते है। 
30 :- बुरे वक्त में इन्सान की असली पहचान होती है। 
31 :- जहा ज्ञान होता है वहा घमंड नही होता है। 
32 :- ज्ञानी व्यक्ति अपने ज्ञान पर कभी घमंड नही करते है। 
33 :- जहा क्रोध होता है वहा ज्ञान नष्ट होने लगता है। 
34 :- कामयाब होने के लिए खुश रहना भी जरुरी है। 
35 :- सफलता के लिए हमे अपना मार्ग खुद बनाना होता है। 
36 :- जब आप विफल होते है तो यही सबसे बेस्ट समय होता है जब आप सफलता के लिए अच्छे से तैयारी कर सकते है। 
37 :- मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता खुद है। 
38 :- जीवन में आराम हराम है। 
39 :- इन्सान तो कही भी पैदा होते है लेकिन इंसानियत कुछ ही लोगो में देखने को मिलती है। 
40 :- जो सफल होते है वे नये रास्ता ढूढ़ते है जबकि असफल बहाना ढूढ़ते है। 
41 :- जो लोग महान होते है वे दुसरे से हमेशा थोड़ा  झुककर ही बात करते है। 
42 :- अगर आपके अंदर विश्वास है तो आप बड़े से बड़ा काम भी आप कर सकते है। 
43 :- माता पिता की सेवा ईश्वर की सेवा है। 
44 :- इस  धरती पर जन्म देने वाली माँ ही हमारी ईश्वर है और पिता हमारा पालनहार। 
45 :- जैसा सोचोगे वैसी ही ये दुनिया आपको दिखाई देगी। 
46 :- ईश्वर की शक्ति के आगे हम अभी कुछ भी नही है इसलिए बुरे कर्म करने से डरे। 
47 :- जो दिल ए सच्चे होते है वे कभी भी दुसरो का अहित नही सोचते है। 
48 :- हमे मागने के बजाय देने वाला बनना चाहिए। 
49 :- सबके लिए समान समय होते है कुछ लोग सफलता की नई इमारत बनाते है कुछ लोग असफल होने का बहाना ही ढूढ़ते है। 
50 :- ज्ञान एक ऐसी वस्तु है जो बाटने से हमेशा  बढ़ता है। 
51 :- चरित्र का निर्माण कई वर्षो के मेहनत का परिणाम होता है जबकि चरित्र को नष्ट होने में एक सेकंड का भी समय नही लगता है। 
52 :- अगर आपके जीवन में लक्ष्य है तो आप जीवन के सही रास्ते पर जा रहे है। 
53 :- जब आपके सामने कोई समस्या ही नही हो तो समझ लेना आप गलत रास्ते पर जा रहे है। 
54 :- जिदगी में सफल होने के लिए खुद से रास्ते बनाने पड़ते है जैसा आपका रास्ता होंगा मंजिल भी वैसी ही होंगी। 
55 :- हमेशा  लीडर बनने की कोशिश करे क्युकी लीडर अपने लक्ष्य के प्रति आशावान होता है। 
56 :- इन्सान चाहे जितना अच्छा बनने की कोशिश करे लेकिन कभी ना कभी कोई भूल हो ही जाती है। 
57 :- दुनिया में सबकुछ बदल जाता है लेकिन इन्सान अपने चरित्र को जल्दी बदल नही पाता है। 
58 :- समय और समझ एक साथ बहुत कम मिलती है लेकिन जिससे यह दोनों एक साथ मिलता है बहुत ही किस्मत वाले होते है। 
59 :- जीवन में जीते जी कद्र सबको नही मिल पाती है। 
60 :- समय और काम निकलने पर अक्सर लोग साथ छोड़ देते है। 

महान सफलता के लिए 50 अच्छे वचन


You Know what, आजकल खासकर २०१५ से हम सब एक आभासी दुनिया में आ गए है। बढ़ती गरीबी घटते रोजगार विलासिता भरा जीवन जीने की उम्मीद में हम इस कदर डूबे  जा रहे है। अपने रिश्तेदार और समाज से सीधे मुँह या बिना फायदे के बात ही नहीं कर रहे है।  देश भी ऐसे भ्रष्ट नकली आदर्श वाले नेताओ से और गर्त में जा रहा है। अमीर और अमीर  गरीब और गरीब हुआ जा रहा है।
मेरे  कहने का मतलब है की अगर आप पैसे वाले नहीं है फिर अगर आपका आचरण अच्छा है। तो आप भी बड़े लोगो के बीच आराम से घुल - मिल सकते है। 
जीवन में प्रेरणा लेने के लिए ऐसे अनमोल विचार हमे हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते है।
इसलिए हमे इन विचारो से प्रेरणा लेकर जीवन के सफलता के रास्ते पर आगे बढ़ते रहना चाहिए


1 :- माफ़ी मागने से कोई छोटा या बड़ा नही हो जाता है माफ़ी यह दर्शाता है की लोग रिश्ता कितना निभाना चाहते है। 
2 :- जहा खुद की कद्र ना हो वहाँ जाना बेकार होता है। 
3 :-लोग तो हजारो मिल जायेगे लेकिन कोई भी माँ बाप का स्थान नही ले सकता है। 
4 :- दुनिया में सिर्फ माँ बाप ही ऐसा है कभी भी अपने संतान का अहित नही चाहते है। 
5 :- दुसरो के दुःख को देखकर हॅसना  सबसे बड़ी मुर्खता है क्या पता आने वाले समय में ऐसा आपके साथ भी हो जाए। 
6 :- जहाँ  इच्छा होती है वही सफलता के नये इतिहास लिखे जाते है। 
7 :- क्या नही मिला ये भूल जाओ, कितना और अधिक पा सकते है इसके लिए प्रयास करो। 
8 :- अगर आप काम के साथ मजाक करते है तो वक्त एक दिन आपको मजाक बना देंगा। 
9 :- अगर सफल होना है तो लोग क्या सोचेगे ये उनपर ही छोड़ दे। 
10 :- जो वक्त के साथ बदल जाते है उनपर कभी भरोसा नही करना चाहिए।
11 :- दुनिया में कई लोग मिल जायेगे जो आपको प्यार करते हो लेकिन आप  खुद को जितना प्यार करते है वैसा कोई दूसरा नही मिलेगा। 
12 :- बुद्धि से बल को हराया जा सकता है। 
13 :- अँधेरा चाहे कितना भी घना क्यों ना हो, उसको अस्तित्व को मिटाने के लिए दीपक की एक लौ ही काफी होती है। 
14 :- जिसका जैसा स्वाभाव होंगा वह वैसा ही बनेगा, बबूल के पेड़ में कभी मीठे फल नही लग सकते है। 
15 :- जिसका अपनी इच्छाओ पर नियंत्रण होता है वही लोग अपने दुखो पर काबू पा लेते है। 
16 :- आपका नजरिया ही आपको खास बनाता है। 
17 :- वही लोग असफल होते है जो प्रयास करना छोड़ देते है। 
18 :- खुद पर विश्वास करे ईश्वर भी आपपर विश्वास करने लगेगे। 
19 :- दुःख आना निश्चित है तो इसे सोचकर घबराना क्यू। 
20 :- अगर हारने का डर है तो कभी जीतने के बारे नही सोचना चाहिए। 
21 :- एक मिनट में लिया गया फैसला पूरी जिन्दगी को बदलने के लिए काफी होता है। 
22 :- जब आपका लोग नकल करना शुरू करते है तो समझ जाना की आप सफलता के रास्ते पर चल रहे है। 
23 :- किसी को हरा तो सकते है लेकिन किसी को जीतना मुश्किल होता है। 
24 :- आवश्यकताये कभी भी खत्म नही होती है एक पूरी होती है तो दूसरी आ जाती है। 
25 :- गलत सोच इन्सान को हमेसा नीचे ही गिराता है। 
26 :- रिश्ते तभी लम्बे समय तक बने रहते है जब आप उन्हें निभाने के लिए समय देते है। 
27 :- इन्सान कैसा का असली परिचय उसकी जुबान ही करवाती है। 
28 :- कर्म की इस दुनिया हमेसा मेहनत करने वालो को ही सम्मान मिलता है। 
29 :- एक सज्जन व्यक्ति कभी भी दुसरो की भावनाओ को ठेस नही पहुचाता है। 
30 :- गरीबी कभी भी उम्र पूछकर नही आती है।
31 :- जो लोग आपसे जलते है वे लोग आपकी सफलता के आगे अपनी पराजय स्वीकार कर चुके है। 
32 :- जबतक मन में लालच, बेईमानी, स्वार्थ, बैर, नफरत रहेगा, आप कही भी खुश नही रह सकते है। 
33 :- अपने झोपडी में अपने राज से रहना, महलो में गुलामी करने से बेहतर है। 
34 :- धैर्यवान होना सभी सिखाते है लेकिन कोई भी पीड़ा बर्दास्त नही करना चाहता। 
35 :- हालात चाहे जैसे भी हो मुस्कान कभी भी खत्म होने  नहीं देना चाहिए। 
36 :- पिता का सिर पर आशीर्वाद रास्ते में आने वाले हर कांटे को फूल बना देते है। 
37 :- जो लोग अपने परिश्रम से पसीने बहाने है वही लोग एकदिन सफल भी बनते है। 
38 :- जहा विश्वास  होता है वहा सबुत की जरूरत नही पड़ती है। 
39 :- हालात चाहे जैसे भी हो कभी भी डरकर पीछे नही हटना चाहिए। 
40 :- इन्सान की जब जरूरते पूरी हो जाती है तो उसके बात करने का तरीका भी बदल जाता है। 
41 :- गुस्सा इन्सान को खा जाता है यह सीधा खुद पर वॉर करता है। 
42 :- जिन्होंने दर्द को झेला है कभी भी दुसरो को दर्द नही दे सकते है। 
43 :- अक्सर ठोकरे ही इन्सान को सम्भलने का मौका देती है। 
44 :- जीवन में पैसा ही सबकुछ नही होता है व्यवहार से बड़े बड़े लोगो से रिश्ता बनाया जाता है। 
45 :- मुँह  से निकलने वाले शब्द हमेशा  सुंदर होना चाहिए क्युकी लोग चेहरे को भूल जाते है लेकिन शब्द हमेशा  याद रहते है। 
46 :- रिश्तो का कभी भी इस्तेमाल नही करना चाहिए क्युकी धन तो बहुत मिल जायेगे लेकिन ऐसे लोग बार बार नही मिलते है। 
47 :- हाथ से कोई भी छीन सकता है लेकिन नसीब से कोई नही छीन सकता है। 
48 :- कामयाबी के रास्ते पर मुश्किले जरुर आती है। 
49 :- गुलामी खुद के अंदर के ताकत और जमीर को मार डालता है। 
50 :- जो लोग सत्य का साथ देते है वे अक्सर अकेले ही होते है। 


शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

Independence Day 2020

छात्रों के लिए मोटिवेशनल Independence Day  इन हिंदी 2020




आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, सभापति महोदय, प्रधानाध्यापक, शिक्षक गण, अभिभावक गण और मेरे सहपाठियों.

आज हम अपने देश की स्वतंत्रता दिवस की 74 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं.

यह दिन भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा हुआ है जिसे हर भारतीय जानता है और इसकी वजह से अपने आपको गौरवान्वित समझता है.

15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों के शासन से आजाद हुआ. इस आजादी के लिए भारत के कई माताओं ने अपने बेटे कुर्बान किए, कई दुल्हनों ने अपने सुहागो को बलिदान होने के लिए भेजा, तब जाकर यह आजादी हमें मिली.

अंग्रेजो ने हमारे देश में लगभग 200 सालों तक शासन किया और भारतीयों पर बहुत अत्याचार भी की है.

उनके शासनकाल के दौरान भारतीयों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा और उनके द्वारा किए गए अत्याचार सहना पड़ा.

लेकिन कहते हैं ना की अति का अंत जरूर होता है. ठीक उसी प्रकार इस ब्रिटिश शासन का भी 15 अगस्त 1947 को अंत हुआ और भारत को आजादी मिली.

इस आजादी की गवाह हम भी हैं क्योंकि हमारे पूर्वजों ने भी इसके लिए अपना बलिदान दिया है और आज हम स्वतंत्र भारत में चैन की सांस लेते हैं और अपने मन मुताबिक अपनी जिंदगी को गुजारते हैं.

जहां हम भारत के स्वतंत्रता की बात करें और महात्मा गांधी का नाम ना आए ऐसा हो ही नहीं सकता. गांधी जी ने अपने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए भारत की आजादी के लिए कई आंदोलन किए.

उनके आंदोलनों की वजह से देश की जनता को एकजुट होने में काफी मदद मिली और अंग्रेजो के खिलाफ इन्होंने अहिंसा का मार्ग अपनाकर अपनी लड़ाई जारी रखी.

चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान, राजगुरु, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस और ना जाने कितने ऐसे वीरों ने अपने पूरी जिंदगी भारत के आजादी के नाम लिख दी.

हर भारतीय को अपने स्वतंत्रता सेनानियों पर गर्व है और इस दिन हम इन सभी को दिल से याद करते हैं और उनको श्रद्धांजलि देते हैं.

इन्हीं शब्दों के साथ में अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं.

जय हिंद जय भारत
15 अगस्त पर भाषण – Heart touching speech on independence day in Hindi

आदरणीय सभापति महोदय प्रधानाध्यापक महोदय अभिभावक गण और मेरे सहपाठियों.

आज हमारे लिए बहुत खुशी का दिन है क्योंकि आज हम भारत की स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं.

हर साल 15 अगस्त को भारत के कोने कोने में राष्ट्रीय ध्वज कब फहराया जाता है और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को ज्ञात किया जाता है.

स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने अपनी जानो का बलिदान दिया.

अपने घर त्याग दिए उन सुख त्याग दिए और भारत की आजादी की लड़ाई में अंग्रेजो के खिलाफ डटकर खड़े हुए.

उन्हीं की कुर्बानियों का नतीजा है कि आज हम यहां पर खुली हवा में खड़े होकर अपना राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे हैं.

15 अगस्त 1947 के पहले हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था. अंग्रेज भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में आए. शुरुआत में इन्होंने व्यापार के बहाने से भारत में शरण ली और फिर धीरे-धीरे इन्होंने भारत पर कब्जा कर लिया.

इनके शासन के समय अंतराल में भारतीयों पर काफी अत्याचार हुए.

भारत देश वीरों का देश है और हमेशा से यहां पर वीर सपूत पैदा होते रहे हैं.

अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध भारत के वीरों ने जंग छेड़ दी.

भारत के वीर अंग्रेजो के खिलाफ खड़े हुए जबकि कई लोगों ने अहिंसा के रास्ते पर चलकर अंग्रेजों का विरोध किया और उन्हें भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया.

हमारे राष्ट्रपिता उन्हीं में से एक हैं जिन्होंने अहिंसा का मार्ग अपनाया और इसमें कई भारतीय शामिल हुए. उन्होंने महात्मा गांधी का पूरा समर्थन किया और अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन करते रहे.

सुभाष चंद्र बोस की बात करें तो उन्होंने आजाद हिंद फौज की गठन की और अंग्रेजो के खिलाफ लड़े. सरदार भगत सिंह ने बचपन से ही भारत की आजादी के लिए अपना काम शुरू कर दिया.

23 मार्च 1931 को भगत सिंह ने अपने देश के लिए हंसते-हंसते अपनी जान की कुर्बानी दे दी.

उसी देश के वासी हैं जिस देश में इन सभी बहनों ने जन्म लिया.

हम अपने भारतवर्ष पर गर्व करते हैं और इस की एकता और अखंडता के लिए हमेशा तत्पर खड़े तैयार रहते हैं.

आज हम सभी देशवासी यह प्रण करते हैं कि जब तक जिएंगे देश के लिए जिएंगे और मरेंगे तो देश के लिए मरेंगे.

चाहे कोई बाहरी ताकत आ जाए हम सब मिलकर एक साथ उसका सामना करेंगे और उस को पराजित करेंगे.

शब्दों के साथ में अपना भाषण समाप्त करता हूं.

जय हिंद जय भारत

डॉक्टर मरीज हसीं मज़ाक

डॉक्टर मरीज हसीं मज़ाक 



डॉक्टर को इस धरती का दूसरा भगवान माना जाता हैं कहते हैं कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं डॉक्टर मरीजों का इलाज करके उनको दूसरा जन्म देते है ये मानव धर्म की सबसे बड़ी सेवा हैं जो डॉक्टर के द्वारा की जाती हैं।

परन्तु कुछ डॉक्टर इसका गलत उपयोग कर रहे हैं यदि किसी को थोड़ी सी बीमारी हो जाए तो उसको बड़ा-चढ़ा कर बता देते हैं और उस मरीज के परिजनों से अच्छा खासा पैसा वसूल करते हैं बहुत से डॉक्टर अच्छे भी होते हैं जो मरीजों की भलाई के लिए कुछ भी कर जाते हैं, डॉक्टर भी एक इंसान ही हैं और सभी का दिमाक अलग-अलग चलता हैं और हमारा समाज दुनिया के सभी डॉक्टर का सदैव ऋणी रहेगा उनका उपकार हमारा समाज कभी नहीं भुला सकता।

तो चलिए इस पोस्ट में कुछ बेहतरीन डॉक्टर शायरी स्टेटस कोट्स, दिए गए हैं जिनको कॉपी करके आप अपने परिजनों को और अपने परिवार के डॉक्टर को भेज सकते हैं।






पत्नी - ये जो तुम रोज फेसबुक पर रोमांटिक शायरियां लिखते हो कि,  'ये तेरी जुल्फें हैं जैसे रेशम की डोर'
ये किसके लिये लिखते हो ?
पति - पगली तेरे लिये ही लिखता हूं, मेरी जानू !
पत्नी - तो फिर वो ही रेशम की डोर कभी दाल में आ जाती है तो इतना चिल्लाते क्यों हो!

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पत्नी - मैं मायके तभी जाऊंगी, 
जब आप मुझे छोड़ने आओगे
पति - मंजूर है पर वादा करो कि घर भी तुम तभी आओगी, 
जब मैं तुम्हें लेने आऊंगा...!!! 

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एक लड़की की आंख का ऑपरेशन चल रहा था। 
लड़की - डॉक्टर प्लीज मेरे बॉयफ्रेंड को अंदर बुला लीजिए।
डॉक्टर - विश्वास करो मैं बहुत शरीफ आदमी हूं। 
लड़की - लेकिन आपकी नर्स बाहर अकेली है और मेरा बॉयफ्रेंड बहुत बड़ा कमीना है। 

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लड़की वाले पप्पू को देखने आए और कहा.... 
लड़के को रहने दो, लड़के का मोबाइल दिखा दो।

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पत्नी उदास बैठी थी
पति – तबियत ठीक नहीं है क्या?
डॉक्टर को दिखा लो
पत्नी – दिखाया था डॉक्टर को
पति – क्या बताया उसने?
पत्नी – बोल रहा था
ब्लड में शॉपिंग की कमी है
थोड़ा मॉल वगैहरा घूम कर आओ
मूड बदलेगा तो ठीक हो जाओगी 🙂 🙂
पति बेहोश 🙂

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एक महिला बहुत दिनों से बीमार थी
महिला – डॉक्टर साहब दवाईयां कब तक चलेंगी
डॉक्टर – पहले ये बताइये
अब आपकी तबियत कैसी है?
महिला – पहले से तो काफी ठीक है
आज सुबह तो थोड़ी लड़ाई भी की थी उनसे 🙂

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एक मोटी औरत दाँत निकलवाने गयी
डॉक्टर – एक हजार रूपये लगेंगे
मोटी औरत – कुछ कम में नहीं होगा
डॉक्टर – बिना एनेस्थेसिया लगाए निकलवा लो
200 में हो जायेगा लेकिन दर्द बहुत होगा
औरत – कोई बात नहीं बिना एनेस्थेसिया के ही निकालो
डॉक्टर ने दांत निकाल दिया
वो औरत बिल्कुल भी ना चीखी ना चिल्लाई
डॉक्टर उसकी हिम्मत देखकर बड़ा खुश हुआ
उसने 200 rs भी नहीं लिए उल्टा बहादुरी के लिए
500 रूपये इनाम दिए
अगले दिन वो डॉक्टर अपने बगल वाले डॉक्टर से बोला
डॉक्टर – यार कल एक बड़ी बहादुर औरत आयी थी
बिना एनेस्थेसिया के दांत निकलवा लिया
दूसरा डॉक्टर – अबे वो औरत एकदम चालाक है
पहले मेरी दुकान पे आयी थी दांत निकलवाने
मैंने एनेस्थेसिया लगा कर उसे आधा घंटा
बाहर बैठने को कहा था
वो कमीनी भाग गयी 🙂 😉

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लड़की शाल ओढ़ के डॉक्टर के पास गयी
लड़की – सुबह से चक्कर से आ रहे हैं
डॉक्टर – तुम्हारी नब्ज तो ठीक
चल रही है, एकदम घड़ी की तरह है
लड़की – अरे नहीं
आपने गलती से नब्ज की जगह
मेरी घड़ी पर हाथ रखा हुआ है 

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एक औरत डॉक्टर के पास गयी
औरत – डॉक्टर साहब मेरे पति 3 दिन से बहुत बीमार हैं
डॉक्टर – पति को क्यों नहीं लायी
औरत – वो घर का काम कर रहे हैं
डॉक्टर – मैं ये दवाई दे रहा हूँ इन्हें खाते ही नींद आ जाएगी
औरत – ये दवाइयाँ उन्हें कब देनी हैं ?
डॉक्टर – ये उनके लिए नहीं तुम्हारे लिए हैं
चुपचाप खाके सो जाना पति को आराम करने देना

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संता बीवी से परेशान होके डॉक्टर के पास गया
संता – डॉक्टर साहब मैं बहुत दुःखी हूँ
डॉक्टर बंता – क्या हुआ मुझे बताओ
संता – मेरी बीवी रोज होटल में जाती है
खूब शराब पीती है और नए लड़कों के साथ ऐश करती है
डॉक्टर बंता – घबराओ मत मुझे बताओ
कौन से होटल जाती है 🙂 🙂
संता बेहोश

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संता दाँत निकलवाने डॉक्टर के पास गया
संता – डॉक्टर साहब मेरे से कुछ खाया पिया नहीं जाता
डॉक्टर – क्यों ?
संता – मेरे दाँत में कीड़ा लगा है इसे निकाल दीजिये
डॉक्टर – ठीक है मैं दवाई देता है
संता – उफ्फ इस दाँत दर्द से तो मर जाना बेहतर है
डॉक्टर – confirm बताओ फिर मैं उसी हिसाब से दवाई लिखूं

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लड़की परेशान सी डॉक्टर के पास गयी
लड़की – डॉक्टर साहब मैं गर्मी से बहुत परेशान हूँ
डॉक्टर – क्या परेशानी है आपको?
लड़की – मुझे सिगरेट पीते हुए बहुत ज्यादा गर्मी लगती है
एक कश पीती हूँ फिर माथे से पसीना पौंछती हूँ
दूसरा कश लेती हूँ तो गर्मी से एक कपडा उतार देती हूँ
तीसरा कश लेती हूँ तो फिर एक कपडा उतार देती हूँ
डॉक्टर – घबराइये मत
सिगरेट लीजिये और आराम से बताइये

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एक लड़की ने हड़बड़ाहट में फोन किया
लड़की – आप जल्दी से एम्बुलेंस भेज दीजिये
ऑपरेटर – आपको क्या हुआ है?
लड़की – अरे मेरा नाख़ून टूट गया है
ऑपरेटर – इतनी सी बात के लिए आप एम्बुलेंस मंगा रही हैं
लड़की – एम्बुलेंस तो मेरे बॉयफ्रेंड के लिए चाहिए हैं
उसे मेरे ऊपर हंसना नहीं चाहिए था ना 🙂 🙂
ऑपरेटर बेहोश

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संता के हाथ पर लाल दाग पड़ गया
संता – डॉक्टर साहब मच्छर ने मेरे हाथ पे काट लिया
डॉक्टर – आपको पहले कभी डेंगू से तकलीफ हुई है क्या?
संता – हां एक बार हुई है
डॉक्टर – कब?
संता – बचपन में
जब टीचर ने डेंगू की स्पेलिंग पूछी थी 🙂 🙂
डॉक्टर अभी तक बेहोश है

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रमेश - मै  केले लेकर आया , पर मेरे खाने से पहले बंदर छीनकर  भाग गया। 
सुरेश - बंदर मुझसे ज्यादा समझदार निकला, मै भी यही करता।

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बच्चा  - इस चिड़ियाघर में चिड़िया कहा है ? यहाँ तो बंदर ही बंदर दिखाई देते है। 
चौकीदार - शायद , इन शैतान बंदरो ने चिड़ियों  को उड़ा दिया है।  

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ये कैसा धोखा?
एक डॉक्टर के पास एक बेहाल मरीज़ गया।

मरीज़: डॉक्टर साहब पेट में बहुत दर्द हो रहा है।

डॉक्टर: अच्छा, ये बताओ आखिरी बार खाना कब खाया था?

मरीज़: खाना तो रोज ही खाता हूँ।

डॉक्टर: अच्छा-अच्छा, (2 ऊँगली उठाते हुए ) आखिरी बार कब गए थे?

मरीज़: जाता तो रोज ही हूँ पर होता नहीं है।

डॉकटर समझ गए कि कब्ज़ है। अन्दर बहुत सारी बोतलें पड़ी थी उस में से एक उठा लाये और साथ ही केल्क्युलेटर भी लेते आये।

फिर पूछा, "घर कितना दूर है तुम्हारा?"

मरीज़: 1 किलोमीटर।

डॉक्टर ने केलकुलेटर पे कुछ हिसाब किया और फिर बोतल में से चार चम्मच दवाई निकाल कर एक कटोरी में डाली। डॉक्टर: गाडी से आये हो या चल कर?

मरीज़: चल कर।

डॉक्टर: जाते वक्त भाग के जाना।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से बाहर निकाल ली।

डॉक्टर: घर कौन सी मंज़िल पे है?

मरीज़: तीसरी मंज़िल पे।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

डॉक्टर: लिफ्ट है या सीढियाँ चढ़ के जाओगे?

मरीज़: सीढियां।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

डॉक्टर: अब आखिरी सवाल का जवाब दो।

घर के मुख्य दरवाजे से टॉयलेट कितना दूर है?

मरीज़: करीब 20 फुट।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

डॉ: अब मेरी फीस दे दो मुझे पहले फिर ये दवाई पियो और फटाफट घर चले जाओ, कहीं रुकना नहीं और फिर मुझे फोन करना। मरीज़ ने वैसा ही किया।

आधे घंटे बाद मरीज़ का फोन आया और एकदम ढीली आवाज में बोला, "डॉक्टर साहब, दवाई तो बहुत अच्छी थी आपकी पर आप अपना केलकुलेटर ठीक करवा लेना। .
.
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.
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हम 10 फुट से हार गये।

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डॉक्टर की नजर में हिंदी गाने!
तुझे चलना होगा
Orthopedic

हौले हौले से दवा लगती है
Homeopathy

मार दिया जाये या छोड़ दिया जाये बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
Surgeon

आओ तु मुझे सुना मैं तुझे सुनाउँ अपनी प्रेम कहानी
Psychiatrist

उनसे मिली नजर कि मेरे होश उड़ गए
Anasthetist

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डॉक्टर की होशियारी!

मरीज: डॉक्टर साहब, जल्दी कुछ करो, मेरे पैरों पर एक औरत ने गाड़ी चढा दी।

डॉक्टर ने अच्छे से चेक किया और पाया कि मामूली चोट है पर मरीज घबराया हुआ है।

डॉक्टर: ओ हो, भाई आपरेशन करना पडेगा, बहुत खर्चा आयेगा... तैयार हो?

मरीज: कुछ भी करो जल्दी करो। कमीनी ने मरा सोच कर उठाया भी नहीं।

इतने में ही डॉक्टर की पत्नी का फोन आया।

डॉक्टर: हैलो

पत्नी: हैलो छोड़ो, ये बताओ मैं क्या करूं? मुझसे कार चलाते में एक आदमी मर गया जय हिंद चौक पर।

डॉक्टर: आदमी ने कपड़े कैसे पहन रखे थे?

पत्नी: हरी टी शर्ट और काली पैंट।

डॉक्टर: ओ हो, तो उसे तुमने मारा है। पुलिस खूनी को तलाश करती हुई घूम रही है।

पत्नी: तो अब क्या करूं?

डॉक्टर: करना क्या है, 4-6 महीने के लिए मायके भाग जा जल्दी।

पत्नी: ठीक है जा रही हूँ।

मरीज: डॉक्टर साहब करो ना कुछ।

डॉक्टर: भाई कुछ नहीं हुआ है तेरे को, ये ले 500 रूपये और चार बियर ले आ, दोनो पियेंगे... और हाँ, यह हरी टी शर्ट निकाल के जा।

दो बीज

सफलता प्राप्त करने के लिए निडर बने 



दो बीज थे। एक बड़ा और दूसरा छोटा। एक दिन दोनों धरती की गोद में गिर पड़े। तभी तेज आंधी आई और मिट्टी ने उन्हें ढंक दिया। दोनों रातभर मिट्टी के नीचे सुख की नींद सोए। प्रातः काल दोनों जगे तो एक के अंकुर फूट गये, और वह ऊपर उठने लगा।



यह देख छोटा बीज बोला — भैया ऊपर मत जाना, वहां बहुत भय है। लोग तुझे रौंद डालेंगे, मार डालेंगे। बड़ा बीज सब सुनता रहा और चुपचाप ऊपर उठता रहा। धीरे धीरे धरती की परत पार कर ऊपर निकल आया और बाहर का सौंदर्य देख कर मुस्कुराने लगा। सूर्य देवता ने उसे स्नेह से धूप स्नान कराया और पवन देव ने पंखा डुलाया। वर्षा आई और शीतल जल पिला गई। किसान आया और चक्कर लगा कर चला गया। बड़ा बीज बढ़ता ही गया। झूमता – लहलहाता, फूलता और फलता हुआ एक दिन परिपक्व अवस्था तक जा पहुंचा। जब वह इस संसार से विदा हुआ तो अपने जैसे असंख्य बीच छोड़ कर हंसता और आत्मसंतोष अनुभव करता हुआ विदा हो गया।

समोखन के किस्से और कारनामे


मिट्टी के अंदर दबा छोटा बीज  अब यह देखकर पछता रहा था कि भय और संकीर्णता के कारण मैं जहां था, वहीं पड़ा रहा और मेरा भाई असंख्य गुना समृद्धि पा गया।

शिक्षा — इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें निडर हो कर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

बुधवार, 22 जुलाई 2020

शास्त्री जी ने इस किस्से को ख़त्म किया

लाल बहादुर शास्त्री - कद छोटा काम बड़े बड़े 





ये कहानी  है लाल बहादुर शास्त्री जी की। आप लोग यह तो जानते ही होंगे की लाल बहादुर शास्त्री जी एक साधारण जिंदगी जीने वाले इंसान थे।

आज मैं आपको उनके बारे में एक ऐसी बात बताने वाला हूँ। जो आप नहीं जानते होंगे।

जब भी लाल बहादुर शास्त्री जी किसी भी काम को करते थे। वे अपने आस – पास के लोगो से राय जरूर लेते थे। वह यह नहीं देखते थे की यह नौकर है या कोई सहयोगी है।

दूसरे लोग यह देखकर सोचते थे की इतने बड़े देश का प्रधानमंत्री, जिसके पास सलाहकार है, फिर भी वह आम लोगो से सलाह क्यों लेते है।

एक दिन शास्त्री जी के पास बड़ा मुद्दा आया और उन्होंने इसे हल करते समय अपने नौकर की सलाह ली। यह देखकर एक सलाहकार बोला – सर आप एक बात बताइये।

आप देश – विदेश के मुद्दों पर चर्चा कर रहे होते है और एक नौकर से पूछ लेते है।

यह नौकर आपको क्या सलाह देगा। यह तो ज्यादा पढ़ा लिखा भी नहीं है। शास्त्री जी मुस्कुराते हुए बोले – मैं तुम्हे एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूँ। उसके बाद तुम सब समझ जाओंगे।

यह किसा है न्यूटन का, जिसके दिमाग और बुद्धि की तारीफ़ आज भी की जाती है। उनके पास एक बिल्ली थी और उस बिल्ली ने दो बच्चो को जन्म दिया।

उन बच्चो और बिल्ली को जब भी घर से बाहर जाना होता था। तब वे दरवाजे के पास जाकर उछल – कूद करने लगते थे।
एक दिन न्यूटन ने अपने नौकर को बुलाया और उससे कहा – इस दरवाजे में दो छेद कर दो। एक बड़ा बिल्ली के निकलने के लिए और एक छोटा, बच्चो के निकलने के लिए।

यह सुनकर नौकर बोला – हमे दो छेद करने की जरूरत नहीं है। बड़े ही छेद से बिल्ली भी निकल जायेगी और बच्चे भी।

यह सुनकर न्यूटन उस नौकर का मुँह देखते रह गए और सोचने लगे की यह बात उनके दिमाग में क्यों नहीं आयी।

जैसे ही शास्त्री जी ने इस किस्से को ख़त्म किया। वह सलाहकार सब कुछ समझ गया।

दोस्तों इस कहानी  से मैंने यह समझा  की इस दुनिया में हर इंसान बुद्धिमान होता है लेकिन अगर आप एक मछली को इस बात से जज करेंगे की वह पेड़ पर नहीं चढ़ सकती तो आप गलत कर रहे है।

जिंदगी में हर इंसान की कीमत होती है। हर इंसान के अंदर ऐसे गुण होते है। जिनके दम  पर वह इस दुनिया को बदल सकता है इसलिए किसी भी इंसान को कम मत समझो।  | बड़ा बनना है तो शास्त्री जी  की यह  बात मान लो